साहिल पे खड़े
पत्थर उछालकर
तुम क्या समझोगे मेरी गहराई
दरिया हूँ मैं
जो जुस्तजू हो मुझे जानने की
तो डूबना होगा
गहराइयों में मेरी...
शैल
August 2, 2017
साहिल पे खड़े
पत्थर उछालकर
तुम क्या समझोगे मेरी गहराई
दरिया हूँ मैं
जो जुस्तजू हो मुझे जानने की
तो डूबना होगा
गहराइयों में मेरी...
शैल
August 2, 2017