रात पश्मीने की Jul 19 Written by Shalini Garg रात पश्मीने की ओढ़सुकून ढूंढने मैं निकलाबस्ती में हर शख़्ससर्द वीराने में था काँप रहा...शैलJuly 19, 2017 Shalini Garg Previous Previous दिल-ए-नादान Next Next सलामत रहे तू सदा
रात पश्मीने की Jul 19 Written by Shalini Garg रात पश्मीने की ओढ़सुकून ढूंढने मैं निकलाबस्ती में हर शख़्ससर्द वीराने में था काँप रहा...शैलJuly 19, 2017 Shalini Garg